गजब : महीनों तक सोए रहते हैं इस गांव के लोग, अभी तक नहीं सुलझ पाया है रहस्य

दुनिया के नौंवें सबसे बड़े देश कजाकिस्तान में एक छोटा-सा गांव है कचाली। इस गांव में 2010 में एक ऐसी घटना हुई जिसके बाद ये गांव पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।

दुनिया के नौंवें सबसे बड़े देश कजाकिस्तान में एक छोटा-सा गांव है कचाली। इस गांव में 2010 में एक ऐसी घटना हुई जिसके बाद ये गांव पूरी दुनिया में मशहूर हो गया। आपको ये जानकर आश्यर्च होगा कि इस गांव के लोग अचानक काफी गहरी नींद में सोने लगे।वे एक या दो दिन के लिए नहीं बल्कि कई दिनों और कई महीनों तक इसी गहरी नींद में सोए रहते हैं। कजाकिस्तान के इस गांव के लोग महीनों-महीनों तक सोते रहते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इस गांव की हकीकत और क्‍या है ऐसी नींद की वजह।

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इस गांव को ‘स्‍लीपी हॉलो’ कहते हैं। इस गांव में ऐसा क्‍यों होता है इस बार में कई शोध हो चुके हैं, लेकिन आज तक कोई पुख्‍ता प्रमाण इस बारे में नहीं दे पाया जाता है। लेकिन बताया जाता है कि इस गांव में यूरेनियम की काफी समय पुरानी खान से जहरीली गैस निकलने के कारण ऐसा होता है। इस खदान का सालों से इस्‍तेमाल नहीं हुआ है। इस वजह से यहां का पानी भी दूषित है। इसके प्रभाव से जो व्‍यक्ति एक बार सोता है वह कई-कई महीनों तक सोता रह जाता है। वैज्ञानिकों ने यहां के पानी में भी कार्बन मोनाक्‍साइड गैस पाई। इस वजह से ही इस गांव की यह स्थिति मानी जाती है।

कजाकिस्‍तान के गांव के लोगों को एक बार नींद में जाने के बाद कुछ भी याद नहीं रहता है। इस गांव की आबादी 600 लोगों की है। जिसमें से यहां के 14 फीसदी लोगों को यह नींद की बीमारी अपनी चपेट में ले चुकी है। ये लोग खुद नहीं जानते कि आखिर ऐसा क्‍यों होता है। नींद में जाने के बाद इन्‍हें कुछ होश भी नहीं रहता और न ही कुछ भी याद रहता है। फिर जब इन्‍हें दूसरे लोग बताते हैं तो यह बात समझ में आती है कि वे नींद से जगे हैं।

इस बीमारी से परेशान लोगों की यह स्थिति है कि वे कभी भी कहीं भी सो जाते हैं। यहां चलते-चलते सड़क पर ही गिर जाते हैं और सो जाते हैं। इन लोगों का कहना है कि उन्‍हें नीदं का एहसास नहीं होता है और कुछ समय के लिए वह सपनों की दुनिया में चले जाते हैं।बताया जाता है कि नींद से जुड़ा यह पहला मामला 2010 में सामने आया है। एक स्‍कूल के कुछ छात्र अचानक से सो गए। उस वक्‍त स्‍कूल प्रबंधन ने छात्रों को जगाने की काफी कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके बाद से यह नींद का सिलसिला जारी है और लोगों को यह बीमारी लगी हुई है।

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