क्या बिहार की बाढ़ में बह जाएगी नितीश सरकार ?

जहां एक तरफ बिहार में चुनावों का दौर जोरों शोरों में है वहीं दूसरी तरफ बिहार में बाढ़ का मुद्दा एक बार फिर से सामने आ गया है । बिहार की बाढ़ भी बड़ी अलग तरीके की है।

जहां एक तरफ बिहार में चुनावों का दौर जोरों शोरों में है वहीं दूसरी तरफ बिहार में बाढ़ का मुद्दा एक बार फिर से सामने आ गया है । बिहार की बाढ़ भी बड़ी अलग तरीके की है। हर साल आती है और तबाही मचा कर चली जाती है। लोग भी अब इस तबाही के आदी हो चुके है हुए उनको इससे कैसे निपटा जाए अब समझ आ चुका है। इस साल कुल 13 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए है।

105 प्रखंड़ों की सवा नौ सौ पंचायतें बाढ़ का कहर झेल रहीं हैं। बाढ़ में फंसी तकरीबन 70 लाख की आबादी में से 100 से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी है। चुनाव में तबाही कोई मुद्दा नहीं होती अगर चुनाव की तारीखों का एलान बाढ़ की विभीषिका के बीच नहीं होता।
बिहार को हर बाढ़ के बाद कुछ चूड़ा और गुड़ मिल जाता है। इसी के साथ बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन भी। हर साल बाढ़, हर साल आश्वासन। हलांकि इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाढ़ राहत के लिए बिहार को विशेष पैकेज दिया था।

एक्सपर्ट्स की माने तो, सीमावर्ती क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नेपाल चाह कर भी बारिश का पानी नहीं रोक सकता। नेपाल हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर बसा है। पहाड़ों पर जब बारिश होती है तो वो नदियों के रास्ते बिहार में आकर तबाही मचाती है। नेपाल ने उस पानी को रोकने की कोशिश की तो वह खुद तबाह हो जाएगा।

बिहार में बाढ़ सिर्फ एक तरफ से नहीं आती बल्कि कई अलग अलग नदियों का पानी बिहार में प्रवेश करता है। आरा, छपरा, हाजीपुर, पटना, बेगूसराय, मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर होते हुए कटिहार के बाद पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। यूपी से ही आने वाली घाघरा गोपलागंज, सीवान और छपरा में कई जगहों पर बाढ़ लाती है।

सोन, पुनपुन और फल्गु नदी झारखंड से आती हैं। सोन सासाराम, अरवल और आरा के बड़े हिस्से में बाढ़ लाती है। पुनपुन का पानी औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना के कुछ हिस्सों को डुबोता है। फल्गु भी गया, जहानाबाद और पटना में तबाही मचाती है। महानंदा पश्चिम बंगाल से आती है। किशनगंज और कटिहार होते हुए फिर बंगाल चली जाती है। सिर्फ यह नदियां नहीं बल्कि गंगा भी इन्ही सब नदियों की नाम में शुमार है।

बाढ़ के मुद्दे पर नीतीश कुमार को घेरने वाले राजद यह भूल गया है कि उसके शासनकाल में भी बाढ़ से बिहार कराहता रहा है। तब भी सरकार ने आश्वासनों के के अलावा कुछ नहीं दिया था। बिहार में पिछले दस सालों में आई भयानक बाढ़ ने हजारों जिंदगियां लील लीं। राज्य के आपदा विभाग के मुताबिक बाढ़ से इस साल अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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