जानें, भाई दूज पर क्यों की जाती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा?

दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक चलता है।

दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक चलता है। इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज आदि मनाए जाते हैं, जिसमें सबसे आखिरी दिन भाई दूज का त्योहरा मनाया जाता है। इस तिथि से यमराज और द्वितीया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है।

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कौन हैं चित्रगुप्त महाराज और क्या है इनकी महिमा?

– चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था।

– इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है।

– मुख्य रूप से इनकी पूजा भाई दूज के दिन होती है।

– इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है।

चित्रगुप्त पूजा विधि

भाई दूज के दिन स्नानादि के बाद पूर्व दिशा में बैठकर एक चौक बनाएं। वहां पर चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर स्थापित करें। इसके पश्चात विधिपूर्वक पुष्प, अक्षत्, धूप, मिठाई, फल आदि अर्पित करें। एक नई लेखनी या कलम उनको अवश्य अर्पित करें। कलम-दवात की भी पूजा कर लें। फिर एक कोरे सफेद कागज पर श्री गणेशाय नम: और 11 बार ओम चित्रगुप्ताय नमः लिखें। इसके बाद चित्रगुप्त महाराज से अपने और परिवार के लिए बुद्धि, विद्या और लेखन का अशीर्वाद प्राप्त करें।

चित्रगुप्त प्रार्थना मंत्र

मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।

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