इस मुस्लिम महिला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल, ‘खान’ सरनेम बदल कर रख दिया ये उपनाम

सबसे बड़ी बात ये है कि मुस्कान का ऑफिस जब सुबह सुबह खुलता है तो सबसे पहले देश भक्ति के गानों से गूंज उठता है।

देशभक्ति वो जज्बा है जो हर भारतीय के दिल में बसता है। चाहे वो हिन्दू हो मुस्लिम हो या सिख या ईसाई। ऐसे ही देशभक्ति के जस्बे की मिसाल पेश कर रही हैं इंदौर की मुस्कान। जिन्होंने अपने उपनाम ‘खान’ की जगह भारतीय जोड़ कर देशभक्ति की अलख जगा रही हैं। 

ऑफिस में सुबह सुबह बजते हैं देशभक्ति गाने

33 साल की मुस्कान पेशे से रियल एस्टेट सेक्टर की मार्केटिंग कंपनी संचालित करती है। सबसे बड़ी बात ये है कि मुस्कान का ऑफिस जब सुबह सुबह खुलता है तो सबसे पहले देश भक्ति के गानों से गूंज उठता है। उनके साथ साथ पूरे ऑफिस का माहौल देशभक्तिमय हो जाता है।  जब देश भक्ति के गीतों में खो जाते हैं। इसके बाद काम की शुरुआत की जाती है। इनके दफ्तर में करीब दो सौ कर्मचारी हैं। जाति-धर्म के बंधन तोड़ एक मुस्कान ने खुद को देश की पहचान दी है।

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लोगों ने इसका किया खूब विरोध

मुस्कान को अपना सरनेम खान से भारतीय करना इतना आसान नहीं था। लोगों ने उन्हें बहुत समझाया खान सरनेम में क्या बुराई है। ऐसा करने से पहले उन्हें काफी विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन दबाव में आए बिना मुस्कान अपने फैसले पर कायम रही और उपनाम बदलने की जाहिर सूचना प्रकाशित करवाई।

मुस्कान बताती हैं कि जब उपनाम बदलने के लिए जब जाहिर सूचना आई तो कई लोगों ने कहा कि ऐसा क्यों कर रही हो? खान उपनाम में क्या बुराई है? ऐसा हरगिज मत करो, तो मैंने उनसे यही कहा कि मैंने धर्म नहीं बदला और खुद की पहचान देश से ही तो जोड़ी है।

इसके अलावा आधार कार्ड में भी उपनाम बदलने के लिए आवेदन कर दिया है। मुस्कान कहती हैं कि उनका जन्म भारत में हुआ है और देश से बढ़कर कुछ नहीं। उपनाम बदलने का सोचा तो काफी पहले था, लेकिन निर्णय पर अमल इस वर्ष किया है।

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सुबह जब दफ्तर खुलता है तो शुरुआत देशभक्ति गीत ‘ऐ वतन. आबाद रहे तू’ से होती है। उसके बाद ही दूसरे काम होते हैं। मुस्कान बताती हैं कि उन्होंने कभी जाति-धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया, लेकिन कई लोग नौकरी के लिए धर्म के आधार पर सिफारिश लेकर आते थे तो मैं उनसे कहती हूं कि सफलता मात्र धर्म के कारण नहीं काबिलियत से मिलती है।

 

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