…तो इसलिए माथे पर लगाया जाता है तिलक

हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने का काफी महत्व माना गया है। पूजा के समय या किसी भी शुभ कार्य के मौके पर भी मस्तक पर तिलक जरूर लगाया जाता है।

हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने का काफी महत्व माना गया है। पूजा के समय या किसी भी शुभ कार्य के मौके पर भी मस्तक पर तिलक जरूर लगाया जाता है। माथे पर तिलक लगाने की परंपरा हिंदू धर्म में काफी प्राचीन समय से चली आ रही है। प्राचीन काल में जब राजा, महराजा युद्ध के लिए जाते थे तब उनको तिलक जरूर लगाया जाता था।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मस्तक के बीचों बीच भगवान विष्णु का निवास होता है। उस स्थान पर ही तिलक भी लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। साथ ही तिलक लगाने से मन भी शांत रहता है।

इसलिए लगाया जाता है माथे पर तिलक –

तिलक हमेशा माथे के केंद्र (बीच) पर लगाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि हमारे शरीर में सात छोटे ऊर्जा केंद्र होते हैं। मस्तिष्क के बीच के भाग को आज्ञाचक्र कहा जाता है। वहीं यह जगह मनुष्य के शरीर के चेतना का केंद्र होता है। आपको बता दें कि गुरूचक्र को भगवान बृहस्पति का केंद्र भी कहते है। भगवान बृहस्पति देवताओं के गुरू है, इसी वजह से इसे गुरूचक्र भी कहा जाता है। वहीं इस स्थान का एकाग्रता और ज्ञान से परिपूर्ण होना आवश्यक है।

इस उंगली से ही करना चाहिए तिलक-

माथे पर तिलक हमेशा अनामिका उंगली से ही लगानी चाहिए। अनामिका उंगली सूर्य का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए अनामिका उंगली से तिलक लगाने से तेज और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। इसके साथ ही अंगूठे से तिलक लगाने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

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