कोरोना का नए वैरिएंट B.1.640.2. वैक्सीन को भी दे सकता है चकमा

कोरोना के इस नए वैरिएंट का पहला मामला नवंबर में सामने आया था, लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान इस पर अब गया है।

कोरोना के नए वैरिएंट B.1.640.2.पर अभी तक WHO ने शोध शुरू नहीं किया है। हालांकि, फ्रांस के वैज्ञानिकों का दावा है कि नए वैरिएंट में कई आनुवांशिक उत्परिवर्तन देखे गए हैं। कोरोना के इस नए वैरिएंट का पहला मामला नवंबर में सामने आया था, लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान इस पर अब गया है। दावा किया जा रहा है कि जो पहला व्यक्ति इस नए वैरिएंट से संक्रमित था, वह पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुका था। नवंबर में वह तीन दिन की कैमरून की यात्रा कर फ्रांस लौटा था। यहां उसको सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। वैज्ञानिकों ने जब इस वैरिएंट पर शोध किया तो नतीजों ने सभी को चौंका दिया।

अब तक मिले वैरिएंट से काफी अलग है B.1.640.2.

कोरोना के अभी तक जितने भी वैरिएंट सामने आए हैं। उन सबसे यह वैरिएंट काफी अलग है, क्योंकि वैज्ञानिकों को अभी तक B.1.640.2.में ऐसा कुछ भी नहीं मिला है। जो अब तक सामने आए वैरिएंट में हो। इस वैरिएंट में असामान्य संयोजन देखे गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है, कि नया वैरिएंट कई आनुवांशिक परिवर्तनों को दिखाता है। इसकी खोज मेडिटरेनी इंफेक्शन यूनिवर्सिटी हॉस्टपिटल इंस्टीट्यूट ने की है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अब तक इस नए वैरिएंट पर कोई भी जांच शुरू नहीं की गई है।

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किसी भी वायरस की गंभीरता उसमें होने वाले म्यूटेशन के आधार पर तय की जाती है और कोरोना का जो नया वैरिएंट फ्रांस में मिला है, उसमें 46 म्यूटेशन देखे गए हैं। इससे एक बात तो साफ है कि यह नया वैरिएंट काफी खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इस पर शोध होना बाकी है। शुरुआती आंकड़ों से पता चला है, कि इस नए वैरिएंट की फिलहाल ज्यादा संक्रमण दर नहीं है। वैज्ञानिकों को चिंता इस बात की है कि नया वैरिएंट फ्रांस की सीमा के बाहर ब्रिटेन में प्रवेश कर सकता है।

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