मुस्लिम कांस्टेबल ने हिन्दू महिला को कंधो पर बैठाकर कराया भगवान के दर्शन

श्रवण कुमार की कहानी तो आपने सुनी ही होगी जिसने अपने बूढ़े माता पिता को अपने दोनों कंधो पर बैठा कर चारों धाम के दर्शन कराए थे।

Muslim constable श्रवण कुमार की कहानी तो आपने सुनी ही होगी जिसने अपने बूढ़े माता पिता को अपने दोनों कंधो पर बैठा कर चारों धाम के दर्शन कराए थे। लेकिन आज हम आपको श्रवण कुमार की कहानी नहीं बल्कि कलयुग के ऐसे जवान के बारे में बताने जा  रहे है। जिसने दूसरे धर्म का होने के बावजूद एक मिसाल पेश की है। श्रवण कुमार ने तो अपने माता पिता को चार धाम के दर्शन कराया था पर हम जिस सिपाही के बारे में बता रहे हैं उसने राहगीर की मदद की। 

अचानक रास्ते में उनकी तबियत ख़राब हो गए

दरअसल, आंध्र प्रदेश के तिरुमला में  एक मुस्लिम सिपाही (Muslim constable) ने हिंदू महिला को अपने कंधे पर बैठाकर 6 किलोमीटर तक लेकर गया। ताकि महिला तिरुमला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की पूजा कर सके। 58 साल की  महिला मंगी नागेश्वरम्मा तिरुमला मंदिर की दो दिवसीय धार्मिक यात्रा पर निकली थीं। महिला पैदल यात्रा पर निकली थी। अचानक रास्ते में उनकी तबियत ख़राब हो गयी। उनको चलने में भी बहुत दिक्कत हो रही थी।

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तभी कांस्टेबल शेख अरशद ने महिला को देखा

पहाड़ी पर स्थित तिरुमला मंदिर सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर था। मंगी नागेश्वरम्मा नंदलूर मंडल से पैदल तिरुमला के लिए चलीं।  22 दिसंबर की दोपहर उन्हें यात्रा के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो गयी।  इस दौरान कडप्पा जिले की स्पेशल पुलिस के जवान तीर्थयात्रियों की निगरानी में थे। तभी (Muslim constable) कांस्टेबल शेख अरशद ने महिला को देखा। सिपाही ने पहले महिला को अस्पताल  पहुंचाया।  वहां इलाज उपचार कराने के बाद महिला को अपने कंधो पर बैठाकर मंदिर तक पहुंचाया। साथ ही सिपाही ने उस महिला को अपने कंधो पर ले जाकर मंदिर तक पहुंचाया।

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दूसरे कांस्टेबल ने भी एक बुजुर्ग को अपने कंधों पर लेकर छोड़ा

की नजर नागेश्वरम्मा पर पड़ी. कॉन्सटेबल (Muslim constable) शेख अरशद पहले मंगी नागेश्वरम्मा को अस्पताल ले गए. इसके बाद अपने कंधे पर उठाकर 6 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर तक ले गए।  इतना ही नहीं सिपाही ने पहाड़ो के ऊंचे नीचे रास्तों को भी ऐसे ही पर क्र दिया। इस दौरान शेख पहाड़ी पर स्थित जंगल से भी गुजरे। साथ ही एक दूसरे कांस्टेबल ने भी एक बुजुर्ग को अपने कंधों पर लेकर छोड़ा।

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इसके अलावा एक अन्य कॉन्सटेबल ने भी इसी तरह के बुजुर्ग नागेश्वर राव को अपने कंधे पर बैठाकर सड़क तक छोड़ा था, ताकि वो सवारी लेकर घर जा सकें। कॉन्सटेबल शेख अरशद ने इस काम की तारीफ उनके सीनियर और तिरुमला मंदिर आने वाले तीर्थयात्री भी कर रहे हैं। उनकी यह कहानी पूरे आंध्र प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

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