मन्त्र-शक्ति : खुद सीखें व अपने बच्चों को भी सिखाये ये 7 प्रभावशाली मन्त्र ! जानिए कौन से हैं वो श्लोक

आज भी पौराणिक मान्यतावों का महत्व और उनकी शक्ति उतनी ही है जितनी पहले हुआ करती थी, बशर्ते आप सच्चे मन से करें पालन

आज के इस आधुनिकता की दौड़ में प्रायः यह देखा गया है की हिन्दू समाज अपनी संस्कृति से धीरे धीरे विरक्त होता जा रहा है। प्रतियोगिता के इस अंधी दौड़ में मानव का समाज, संस्कृति, शिष्टाचार व आध्यात्म से नाता दूर हो रह है। लेकिन आज भी पौराणिक मान्यतावों का महत्व और उनकी शक्ति उतनी ही है जितनी पहले हुआ करती थी। वेदों व मन्त्रों का प्रभाव आज भी उतना ही है जितना पहले के समय में हुआ करता था। सारी मुश्किलों का हल उन्ही में छुपा हुआ है बसर्ते आप सच्चे मन से उसका पालन करे।

आज हम आपको बताने जा रहे है कुछ मन्त्र जिनका अगर आप प्रतिदिन एकाग्रचित्र होकर पठन पठान करेंगे। तो बच्चे ही क्या वयस्क भी अपने जीवन में उसका समुचित लाभ पा सकेंगे। वैसे मन्त्रों की बात करें तो शास्त्रों में कई दैवीय मन्त्र है उनमे से कुछ बहुत ही प्रभावशाली है तो आईये जानते है उन 7 प्रमुख मन्त्रों को :

1.प्रात: कर-दर्शनम् के साथ प्रभात

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

2.पृथ्वी क्षमा प्रार्थना से कार्यों की शुरुवात

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडिते।
विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे॥

3.त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण के ध्यान प्रारम्भ

ब्रह्मा मुरारी स्त्री पुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

5.सूर्य नमस्कार से दिव्यता की ओर

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।।
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्
सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥

6.संध्या दीप दर्शन से मन शुद्धि

शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते॥

दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

7.शांति पाठ से रात्रि का विश्राम

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

ॐ शांति: शांति: शांति:॥

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