जौनपुर: सरकारी जमीन पर कब्जा दिलाने के एवज में कानूनगो ने ली रिश्वत, वीडियो हुआ वायरल

जौनपुर (Jaunpur) के खुटहन थाना अंतर्गत लगभग छह बिश्वा सरकारी जमीन पर कैराडीह गांव के एक दबंग के द्वारा पुलिस और राजस्व विभाग की मिलीभगत से...

जौनपुर (Jaunpur) के खुटहन थाना अंतर्गत लगभग छह बिश्वा सरकारी जमीन पर कैराडीह गांव के एक दबंग के द्वारा पुलिस और राजस्व विभाग की मिलीभगत से जमीन पर निर्माण शुरू करने के मामले में राजस्व विभाग के एक कर्मचारी द्वारा पैसा लेकर काम करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कानूनगो राम नरायण दूबे घूस (bribe) का पैसा लेकर अपनी जेब में रखते साफ दिखाई दे रहे हैं, जबकि न्यायालय ने गांव का नक्सा बगैर सही कराये किसी भी विवादित जमीन पर निर्माण को स्पष्ट रोक लगा रखा है।

बता दें कि जमीन पर कब्जा दिलाने के एवज में कानूनगो मोटी रकम घूस (bribe) के रूप में ले रहे हैं। उक्त जमीन पर इसके पूर्व भी कई बार निर्माण का प्रयास किया जा चुका था, लेकिन हर बार पुलिस उस जमीन को थाने के नाम होने की बात कहकर निर्माण रोक दिया था। बीते 8 फरवरी को एक बार फिर निर्माण कार्य चालू कर दिया गया है। अब पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह थाने की नहीं, वल्कि पिलकिछा ग्राम पंचायत की जमीन है।

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यदि यह गांव की सरकारी जमीन है तो उस पर किस आधार पर निर्माण हो रहा है। यदि अवैध कब्जा हो रहा है तो इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है। निर्माण कर्ता की दबंगई के आगे ग्राम प्रधान या कोई नागरिक बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। दबी जुबान लोग बोल रहे है कि यह कार्य पुलिस, राजस्व विभाग और भूमाफिया के बीच लाखों की सेटिंग कर कराया जा रहा है।

वायरल वीडियो के मामले में जानकारी देते हुए उपजिलाधिकारी राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि वायरल वीडियो में यह देखने से लग रहा है कि एक आदमी हमारे चकबंदी में कानूनगो है, उनको एक व्यक्ति पैसा (bribe) दे रहा है। कौन दे रहा है… किस लिए दे रहा है… यह कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस घटना को लेकर मीडिया पर कुछ लोग पिलकिच्छा थाने के सामने एक व्यक्ति द्वारा अपनी भुईधरी की जमीन पर निर्माण कराने की बात बोल रहे हैं।

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लोगों ने बताया कि वह सार्वजनिक जमीन है, थाने की जमीन नहीं है, लेकिन उसकी दो बार जमीन की पैमाइश हो चुकी है। थाने की जमीन नहीं है। आदमी की व्यक्तिगत भूधरि है, लेकिन चकबंदी कानूनगो ने हम लोगों से ये बात छुपायी है कि वहां 2019 में ही बंदोबस्त अधिकारी ने आदेश किया है कि इस ग्राम के अभिलेख खराब हो गए हैं। जबतक ये सही न हो जाय, तब तक यह कार्य न किया जाए, तब तक वहां कोई निर्माण कार्य की अनुमति न दी जाए।

यह बात कानूनगो को बतानी चाहिए थी कि ऐसा चकबंदी का आदेश है। यदि ऐसा आदेश कानूनगो बताए होते तो हम लोगों द्वारा पुनर्निर्माण का आदेश नही दिया गया होता। उन लोगों ने यह बात छुपाई है इसके लिए संबंधित लेखपाल और कानूनगो को राजस्व निरीक्षक जो है उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को लिखा गया है। इसको लेकर एसोसी,
डीडीसी द्वारा कमेटी बनाकर इस मामले की जांच की जाएगी। इस मामले में राजनारायण दुबे संलिप्त हैं।

रिपोर्ट- विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

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