जल्द ही कानपुर आईआईटी देगा दुनिया को जलवायु परिवर्तन से बचने का उपाये

भारत सरकार ने भी जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कई कदम उठाये है। पर वो भी ज्यादा काम आते हुए दिख नहीं रहा है। दुनिया भर के देशों की जलवायु में लगातार परिवर्तन होते हुए देखा जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन केवल कुछ ही देशों के लिए समस्या की वजह नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी समस्या है और आने वाले वक्त में ये समस्या मनुष्य जाति के लिए और भी ज़्यादा घातक साबित हो सकती है। इसको रोकने के लिए दुनिया भर की सरकारें और रिसर्च सेंटर इसपे काम कर रहे है। भारत सरकार ने भी जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कई कदम उठाये है। पर वो भी ज्यादा काम आते हुए दिख नहीं रहा है। दुनिया भर के देशों की जलवायु में लगातार परिवर्तन होते हुए देखा जा रहा है।

इसी को देखते हुए कानपुर आईआईटी ने इस गंभीर समस्या के व्यवहारिक समाधान को खोजने के लिए एक नई योजना बनाई है। कानपुर आईआईटी अपने कैंपस में सुधाकर केसवन के साथ मिलकर चंद्रकांता केसवन सेंटर फॉर एनर्जी पॉलिसी एंड क्लाइमेट सॉल्यूशंस की स्थापना की है। जोकि जलवायु परिवर्तन की समस्या से सामना करने में मदद करेगा।

कानपुर आईआईटी छात्र रहे चुके है सुधाकर केसवन

आईआईटी कानपुर और सुधाकर केसवन के साथ आने के बाद स्थापित किये गए इस चंद्रकांता केसवन सेंटर फॉर एनर्जी पॉलिसी एंड क्लाइमेट सॉल्यूशंस को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बता दे कि सुधाकर केसवन कानपुर आईआईटी के छात्र रहे चुके है। उन्होंने 1976 में पासआउट हुए थे। यहीं नहीं सुधाकर केसवन ने नए सेंटर के लिए ढाई मिलियन यूएस डॉलर देने का भी वादा किया है।

कानपुर आईआईटी से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले सुधाकर ने 20 सालों तक आईसीएफ इंटरनेशनल में सीईओ के रूप में कार्य किया है. चंद्रकांता केसवन सेंटर को नीति, संचार, शिक्षा और आउटरीच प्रयासों में एक नया आयाम जोड़ने के मकसद के साथ शुरू किया गया है। सेंटर का नाम भी सुधाकर की माता जी चंद्रकांता के नाम पे रखा गया है।

आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. अभय करंदीकर ने इस नए सेंटर के बारे में बताया कि इस सेंटर का मुख्य उदेश जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम करने में मदद करना रखा गया है। प्रो. अभय करंदीकर ने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में यह सेंटर नई नई रिसर्च को दुनिया के सामने पेश करेगा और इस समस्या के हल को खोजने में बहुत ही सहायक सिद्ध होगा।

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