गृह – नक्षत्र : शादी में रूकावट के कौन से गृह जिम्मेदार और क्या हैं उपाय ? पढ़े इस खबर में

हिन्दू में इसे मात्र दूल्हा दुल्हन के रूप में ही नहीं इसे दो आत्माओ के मिलन रूप में भी देखा जाता है

शादी को एक पवित्र बंधन माना जाता रहा है। खासकर जब बात हिन्दू धर्म की हो तब इसे मात्र दूल्हा दुल्हन के रूप में ही नहीं इसे दो आत्माओ के मिलन रूप में भी देखा जाता है। लेकिन कभी कभी ऐसा होता है की जातक या उसके परिजनों के द्वारा अत्यधिक प्रयास करने पर भी विवाह में देरी उत्पन्न होती रहती है। तो आइए जानते है उन कारणों और उपायों को जो जातक की शादी में रूकावट व समाधान करते है।

क्या हैं कारण

– सत्तम भाव

सत्तम भाव में विघ्न कुंडली में सप्तम भाव की दशा या फिर अन्तर्दशा, सातवें भाव में स्थित ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा या सातवें भाव को देखने वाले ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा हो या छठे घर से संबंधित कोई दशा या अन्तर्दशा चल रही हो तो विवाह में विलम्ब होता है।

– ग्रहों की चाल

मंगल, राहू तथा केतु यदि सातवें घर में हो तो भी शादी देरी से होती है। शनि, मंगल, शनि राहू, मंगल राहू, या शनि सूर्य या सूर्य मंगल, सूर्य राहू, एकसाथ सातवें घर या आठवें घर में हो तो भी विवाह में अड़चन आती है। मांगलिक होना भी विवाह में देरी का कारण है।

क्या हैं उपाय

-शिव जी व माता पारवती जी की पूजा – जिन जातकों को विवाह में अड़चन आ रही होती हैं उन्हें पारद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
शिवजी के साथ ही माता पार्वती की भी पूजा करें। मां पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं। इसके आलावा उन्हें अपने सम्बंधित ग्रहों को शांत करने के लिए उनका जप एवं पूजन विधि विधान से करना चाहिए।

 

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