Farmers Protest: अब और भी उग्र होगा आंदोलन, लोहड़ी की आग्नि में किसान जलाएंगे कृषि बिलों की प्रतियां

केंद्र सरकार (Central Government) के नए कृषि कानूनों के रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर किसानों (Farmers) का आंदोलन आज भी लगातार जारी है।

केंद्र सरकार (Central Government) के नए कृषि कानूनों के रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर किसानों (Farmers) का आंदोलन आज भी लगातार जारी है। देशभर में 13 जनवरी को मनाए जाने वाले लोहड़ी के पर्व पर किसान कृषि कानूनों की कॉपी जलाएंगे। यूपी गेट पर किसानों की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। भारतीय किसान यूनियन (Indian Farmer’s Union) ने किसान आंदोलन को और तेज करने के लिए कृषि बिलों को जलाने का निर्णय लिया है।

लोहरी की अग्नि में जलाएंगे कृषि बिलों की प्रतियां

यूपी गेटर पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों (Farmers) का आंदोलन 48 दिनों से लगातार जारी है। इसी कड़ी में किसान लोहड़ी की अग्नि में तीनों कानूनों की प्रतियों को जलाकर विरोध जताएंगे। यूपी गेट पर शाम साढ़े पांच बजे कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जहां मंच के पास ही लोहड़ी जलाई जाएगी।

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18 जनवरी को मनाया जाएगा महिला किसान दिवस

बताया जा रहा है कि कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों (Farmers) के आंदोलन को सफल बनाने के लिए भारतीय किसान यूनियन 13 जनवरी को कृषि बिलों की प्रतियां दहन करने के साथ-साथ 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाएंगे। इस दिन की मंच की कमान महिला किसानों को हाथ में होगी।

किसान संगठनों की माने तो 17 जनवरी से महिला किसान आंदोलन स्थल पर पहुंचने लगेंगी, जिसके मद्देनजर उनके ठहरने की व्यवस्था हेतु अलग से कैंप तैयार किये जाएंगे। साथ ही महिलाओं की हर तरह की सुविधा मुहैया कराने के लिए महिला वॉलेंटियर तैनात किया जाएगा। महिला कैंप के आसपास पुरुषों का आना-जाना प्रतिबंधित रहेगा।

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26 जनवरी को हर जिले में नियुक्त होंगे प्रभारी

वहीं, इस आंदोलन के मद्देनजर 26 जनवरी को हर जिले में प्रभारी नियुक्त होंगे। साथ ही गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में होने वाली परेड में शामिल होने की तैयारी जोरों पर चल रही है। मंगलवार को युवा किसानों ने आगे तिरंगा बनी टी-शर्ट पहनकर ट्रैक्टर चलाकर रिहर्सल किया। दिनभर युवाओं ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर चलाककर रिहर्सल किया। युवा किसानों का कहना है कि सभी किसान 26 जनवरी पर ऐसी टी-शर्ट पहनेंगे, जिस पर आगे तिरंगा बना हुआ होगा।

तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक

वहीं, केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों (Farmers) के आंदोलन के मद्देनजर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने दूसरे दिन की सुनवाई के दौरान तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने एक कमेटी का गठन कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस समस्या के समाधान के लिए कमेटी बनाने को कहा है। कमेटी बनती है तो उसमें सिर्फ पंजाब के किसान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के किसान संगठनों से बातचीत की जाएगी। देश के कई राज्यों के किसानों ने इस बिल का समर्थन किया है। ऐसे में प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसानों (Farmers) को आशंका है कि उनकी मांगों को नहीं माना जाएगा।

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कृषि कानून को लेकर पिछले 48 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है। बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक कमेटी गठन करने की बात कही थी, जिसके लिए सरकार और किसानों (Farmers) के पक्षकारों से कुछ नाम देने के लिए कहा था। लेकिन अब किसानों ने कमेटी में शामिल होने से इंकार कर दिया है। किसानों का कहना है कि, वह किसी भी कमेटी का हिस्सा नहीं बनेंगे. अगर सरकार बिल को वापस नहीं लेती है तो 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी।

किसान संघर्ष कमेटी ने कहा है कि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) कुछ भी कहे, हमारी मांग सिर्फ तीनों कानूनों को वापस कराने की है। अगर कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तो हमारी तैयारी पूरी है और 26 तारीख को परेड निकाली जाएगी और उससे पहले 13 तारीख को लोहड़ी मनाकर कृषि बिल की कॉपी जलाएंगे और लालकिला कूच करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने किसान संगठन के वकील ए पी सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको विश्वास हो या नहीं, हम सुप्रीम कोर्ट हैं। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि हमें लगता है कि जिस तरह से धरना प्रदर्शन पर हरकतें ( जुलूस, ढोल, नगाड़ा आदि) हो रही हैं उसे देख कर लगता है एक दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ घटित हो सकता है। हम नहीं चाहते कि कोई घायल हो।

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