लॉकडाउन के दौरान अपने घर परिवार से दूर कर रहे थे ड्यूटी, हुए सम्मानित

मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है जब वह दूसरों के काम आए। यह विचार अपर जिला जज अनिल कुमार यादव ने व्यक्त किया।

उरई।  मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है जब वह दूसरों के काम आए। यह विचार अपर जिला जज अनिल कुमार यादव ने व्यक्त किया।रविवार को रेलवे सुरक्षा बल के थाना परिसर में कोरोना योद्धाओं का सम्मान (Honored) समारोह आयोजित किया गया था।

मुख्य अतिथि के रूप में अपर जिला जज अनिल कुमार यादव ने कहा कि वे स्वयं भी कोरोना की बीमारी से जूझे थे, लेकिन उन्होंने किसी को कोरोना की बीमारी नहीं दी और उन्हें आज तक यह भी पता नहीं चल सका कि यह बीमारी उन्हें कैसे हो गई थी।

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कानपुर हाईवे पर एक वृद्धा मिली जिसकी आंखों से….

अपना संस्मरण सुनाते हुए बताया कि कोरोना काल में वे प्रतिदिन 200 पैकेट खाना लेकर सड़कों पर जाते थे और जरूरतमंदों को देते थे। उन्हें इस दौरान उरई कानपुर हाईवे पर एक वृद्धा मिली जिसकी आंखों से आंसू बहते बहते सूख गये थे।

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जिससे मन प्रसन्न हो जाता है

उसने बताया कि वह दो दिन से भूखी है, जब उन्होंने उसे भोजन का पैकेट दिया। फिर वह भोजन कर संतुष्ट हुई। इसके बाद उसने आशीर्वाद दिया। यह दृश्य हर समय याद आती रहती है। जिससे मन प्रसन्न हो जाता है। मंडल रेल सुरक्षा आयुक्त आलोक कुमार ने कहा कि कोविड-19 ने आरपीएफ और जीआरपी फोर्स के जवान और अधिकारियों ने जिस तरह सेवा की है वह सराहनीय है।

 

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