राम की नगरी अयोध्या में इस बार बेहद खास होगी दिवाली

पूरे शहर में करीब 3 लाख 21 हजार दीप जलाकर एक नया विश्व रिकाॅर्ड बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही 24 से 26 अक्टूबर तक तीन दिन में एक हजार से ज्यादा कार्यक्रम होंगे।

राम की नगरी अयोध्या में इस बार दिवाली(Diwali) बेहद खास होगी। पूरे शहर में करीब 3 लाख 21 हजार दीप जलाकर एक नया विश्व रिकाॅर्ड बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही 24 से 26 अक्टूबर तक तीन दिन में एक हजार से ज्यादा कार्यक्रम होंगे। सबसे खास कार्यक्रम होगा- पांच देशों की रामलीला। माॅरीशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सूरीनाम, नेपाल की रामलीला मंडलियों के कलाकार अपने देश की शैली में रामलीला का मंचन करेंगे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में थाईलैंड के महाराजा वजीरालोंगकान मौजूद रहेंगे। देशभर के नामी चित्रकार अयोध्या को राममय करने के लिए त्रेता युग के प्रसंगों को दीवारों और बिल्डिंगों पर चित्रित करेंगे। राम प्रसंगों को रामलीला, भजन व नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस दिवाली(Diwali) में अयोध्या में 800-1,000 ड्रोन एक साथ ‘त्रेता युग’ की जादुई आभा पैदा करने के लिए उड़ान भरेंगे, जो 14 साल के वनवास के बाद सीता के साथ भगवान राम की घर वापसी का प्रतीक है। इस मौके पर एक साथ नौ लाख दीयों को जलाया जाएगा। दीपोत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अयोध्या में होंगे। एरियल ड्रोन शो में भगवान राम के चरित्र को दर्शाया जाएगा।

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इतने दिन का होगा दीपोत्सव कार्यक्रम-

इस बार सात से दस दिन का दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और दीपोत्सव की तैयारियों के नोडल अधिकारी विशाल सिंह ने कहा कि परियोजना के सरकार के सामने प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है ताकि उसे मंजूरी मिल सके। जिसके बाद जल्द ही एक अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य सरकार की योजना सरयू नदी के घाटों को 7.5 लाख दीयों से रोशन करने और 5.5 लाख दीयों के अपने पहले के रिकॉर्ड को तोडऩे की है।

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नवंबर को दिवाली(Diwali) की पूर्व संध्या पर होने वाला यह ‘दीपोत्सव’ योगी आदित्यनाथ सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी मेगा इवेंट होगा। आदित्यनाथ ने 2017 में ‘दीपोत्सव’ कार्यक्रम शुरू किया था जब वह मुख्यमंत्री बने थे और पिछले कुछ वर्षों में यह आयोजन बड़े पैमाने पर हुआ है। इस साल अयोध्या में राम की पैड़ी की इमारतों के 3-डी होलोग्राफिक शो, 3-डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो के साथ प्रदर्शित होगा, जैसा कि पहले के वर्षों में ‘दीपोत्सव’ के दौरान हुआ था।

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एरियल ड्रोन शो सहित सभी शो की कुल लंबाई 35 मिनट होगी, जिसमें 3-डी होलोग्राफिक शो के लिए 8 मिनट और 3-डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो के लिए 10 मिनट शामिल हैं। आयोजन से एक दिन पहले सभी शो का ट्रायल रन किया जाएगा।

गुप्तारघाट से लेकर भरतकुंड़ तक 12 स्थानों पर होगी रामलीला-

अयोध्या के इस दीपोत्सव पर्व को आकर्षक बनाने के लिए इस साल गुप्तारघाट से लेकर भरतकुंड़ तक 12 स्थानों पर रामलीला, भजन, नृत्य नाटिकाओं के मंचन के अलावा अन्य कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा। कई स्थलों को मेले की तर्ज पर सजाया जा रहा है। पिछले साल दीपोत्सव का कार्यक्रम राम की पैड़ी पर फोकस करके आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार पूरे अयोध्या शहर में होगा।

गुप्तारघाट से लेकर 12 किमी दूर भरतजी की तपस्थली नंदीग्राम तक आयोजन किया जाएगा। रामकथा पार्क में दो मंच बनाए गए हैं। ऊपर राम दरबार लगेगा और नीचे सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। विदेशी रामलीला शहर के अलग-अलग हिस्सों में मंचित होगी। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डाॅ. वाईपी सिंह के मुताबिक इस साल दीपोत्सव पर्व में देशभर से 35 सांस्कृतिक दलाें को बुलाया जा रहा है।

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दीपोत्सव के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का प्रयास है। इस वर्ष पांच देशों के रामलीला कलाकार अपनी-अपनी शैली में राम की गाथा का मंचन करेंगे। मॉरिशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सूरीनाम व नेपाल देशों की रामलीला मंडली के कलाकार अपने देश की शैली के माध्यम से रामलीला का मंचन रामनगरी में करेंगे।

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32 सांस्कृतिक दल होंगें शामिल-

आपको बता दें कि इस दीपोत्सव में देश के कोने-कोने से करीब 32 सांस्कृतिक दलों को कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जा रहा है। पिछले साल करीब 25 सांस्कृतिक दल थे। साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा निकलेगी जिसमें विभिन्न प्रांतों के कलाकार अपने प्रदेश की लोकशैली का नृत्य प्रस्तुत करेंगे। साथ ही रथों पर मंचीय शैली के रंगारंग कार्यक्रमों शोभायात्रा का आकर्षण होगा।

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दीपोत्सव(Diwali) में श्रीलंका सहित भारत के विभिन्न प्रांतों से विख्यात कलाकार भी अपनी कला का हुनर दिखाएंगे। इस बार श्रीलंका सहित भारत के कई प्रांतों के जाने-माने चित्रकारों को आमंत्रित किया गया है। आंध्रा की चोरियाल, बंगाल की टेटुआ, उड़ीसा की पट्टशैली व बिहार की मधुबनी शैली की पेंटिंग आकर्षण का केंद्र होगी। सभी कलाकारों अपनी चित्रकला के माध्यम से राम की गाथा को उकेरेंगे। इन चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जो कि दीपोत्सव की भव्यता बढ़ाने का काम करेगी।

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