क्या एक समय पर आप दो अलग-अलग जगहों पर हो सकते हैं मौजूद? जाने यहाँ

एक चीज एक समय में दो अलग अलग जगहों पर हो सकती है मौजूद, समान्तर ब्रह्माण्ड की संकल्पना में ऐसा हो सकता है संभव

मानव मष्तिस्क हमेशा से अंतरिक्ष के रहस्यों को उजागर करने तथा इसकी विराटता को समझने के प्रयास में लगा रहता है। आज दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के सामने समान्तर ब्रह्माण्ड की संकल्पना एक अनसुलझी गुत्थी से काम नहीं है। समान्तर ब्रह्माण्ड की अवधारणा महान भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टाइन के स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के आधार पर दी गयी है। इस अवधारणा में ऐसा बताया जाता है कि कोई एक वस्तु, एक समय में ब्रह्माण्ड के दो अलग अलग जगहों पर मौजूद मिल सकती है।

समान्तर ब्रह्माण्ड जिसे पैरेलल यूनिवर्स भी कहते हैं, हमारे अस्तित्व से जुड़े ब्रह्माण्ड के जैसा ही एक दूसरे ब्रह्माण्ड का एक काल्पनिक स्वरुप है। वैज्ञानिकों का समान्तर ब्रह्माण्ड के विषय में कहना है कि, हमारी गैलेक्सी में बहुत से ब्रह्माण्ड समाहित हैं। चूँकि बहुत से काल्पनिक ब्रह्मांडो की भी परिकल्पना विश्व के तमाम वैज्ञानिकों द्वारा पेश की गयी है। ऐसे में यह भी कहा जाता है कि इन सभी काल्पनिक समान्तर ब्रह्माण्डों के समूह को बहु-ब्रह्माण्ड अवधारणा या मल्टीवर्स भी कह सकते हैं। कई ब्रह्माण्ड-विज्ञानी हमारी इस वास्तविक ब्रह्माण्ड के वजूद में होने का कारण मल्टीवर्स को ही बताते हैं।

एक मल्टीवर्स कई ब्रह्मांडों के साथ भरा हो सकता है जो लगभग हमारे समान हैं या वे अकल्पनीय रूप से भिन्न हो सकते हैं। किसी भी तरह, समानांतर ब्रह्मांडों के क्षेत्र कई दिलचस्प संभावनाओं को खोलते हैं। जैसा कि कई लेखकों ने वर्षों में कल्पना की है, यदि अनंत अन्य ब्रह्मांड हैं, तो कम से कम कुछ ऐसे भी ब्रह्माण्ड हैं जिनमें बिल्कुल उन्ही के स्वरुप के ही अन्य ब्रह्माण्ड पाए जाते हैं। लेकिन इनका यह कथन भी पूरी तरह से भौतिक वास्तविकता से भिन्न हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रकृति के नियम जरूरी नहीं कि हर ब्रह्मांड के लिए समान हों।

क्या मल्टीवर्स में स्थित ब्रह्माण्डों के बीच हो सकती है टक्कर?

अगर हमें यह साबित करना हो कि हम एक मल्टीवर्स में रहते हैं तो यह तभी संभव हो सकेगा यदि हमारा ब्रह्मांड किसी दूसरे से टकराता है। ब्रह्माण्ड विज्ञानियों को कुछ ग्रहों पर एक अलग तरह के छल्लेनुमा धब्बे नजर आये हैं जिनका तापमान बहुत ही कम होता है। इन धब्बों के विषय में वे ऐसा मानते हैं कि संभवतः हमारी धरती के बनने के क्रम में दो ब्रह्माण्ड टकराये होंगे जिनके घर्षण से ये धब्बे बने होंगे।

चूँकि इन धब्बे युक्त जगहों का तापमान भी बेहद कम होता है अतः इस सिद्धांत को तमाम ब्रह्माण्ड विज्ञानी सही बताते हैं क्योंकि ऐसा संभव हो सकता है कि टक्कर के बाद काफी ऊर्जा कि निकल गयी हो जिसके कारण ग्रहों के उस स्थान पर तापमान का बहुत काम होना पाया जाता है। भविष्य में हमारे ब्रह्माण्ड से मल्टीवर्स के किसी ब्रह्माण्ड के टकराने की अगर थोड़ी भी संभावना है तो इसमें कई प्रकाश वर्षों का समय लग सकता है। हालांकि कुछ अंतरिक्ष विज्ञान के विशेषज्ञों का मनना है कि चूँकि अभी तक समान्तर ब्राह्माण से सम्बंधित मामूली साक्ष्य ही मौजूद है तो अभी ऐसी कोई भी घटना संभावित नहीं है।

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