वनस्पति – ज्ञान : इस पौधे की लकड़ियों को आखिर क्यों नहीं जलाते ? क्या है वैज्ञानिक व शास्त्रों के अनुसार वजह पढ़े

जिस तरह से सूरज और चंद्र को एक दूसरे का पूरक माना जाता, उसी प्रकार मनुष्य और प्रकृति को भी

दुनिया के सभी धर्मों में प्रकृति को ईश्वरीय वरदान माना जाता रहा है। पृथ्वी में समस्त जीव भी इससे भिन्न नहीं है। जिस तरह से सूरज और चंद्र को एक दूसरे का पूरक माना जाता है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य और प्रकति को भी। अगर किसी एक को क्षति पहुँचती है तो इसकी आंच दूसरे पर जरूर पड़ती है। आज हम ऐसा ही एक तथ्य बताने जा रहे है जो इस बात को सही साबित करेगा। कि आखिर पेड़ो में बम्बू के बांस को क्यों नहीं जलाया जाता है। इसको जलने के क्या दुष्परिणाम व इसको लगाने से क्या सुखद परिणाम हो सकतें है। आइए जानते है :

क्यों नहीं जलाते है:

ऐसी मान्यता है कि इससे वंश नष्ट होने की मान्यता है। साथ ही बांस जलाने से पितृदोष भी लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बांस जलाने से भाग्य का नाश होता है इसलिए बांस का होना भाग्यवर्धक है। इसके जलाने पर दुर्भाग्य घटित होता है। बांस के पौधे से बांसुरी बनती है। भगवान श्री कृष्ण हमेशा अपने पास बांस की बांसुरी रखते थे। बांस अच्छे भाग्य का भी संकेत देता है इसलिए आप बांस के पौधों को लगाकर उन्हें शक्तिशाली बना सकते है।

बांस के सकारात्मक फायदे

भारतीय वास्तु शास्त विज्ञान के अनुसार बांस को शुभ माना गया है। शादी, जनेऊ, मुण्डन आदि में बांस की पूजा एवं बांस से मण्डप बनाने के पीछे भी यही एक सकारात्मक कारण है। इसका पौधा जहां होता है वहां बुरी आत्माएं नहीं आती है। 136 किस्म के बांस से फर्नीचर बनते हैं जैसे सोफा, कुर्सी, अलमारी आदि। कृषि यंत्र बनाने सहित अन्य साज-सज्जा का समान बनने के लिए भी बांस का उपयोग किया जाता है।बांस की डलिया, टोकरी, चटाई, बल्ली, सीढ़ी, खिलौने, कागज सहित कई वस्तुवों का निर्माण किया जाता है।

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