कपड़े ज्यादा धोना से पड़ रहा पृथ्वी पर बुरा प्रभाव , जानें- कितने दिन में धोने चाहिए गंदे कपड़े

जानकारों ने दावा किया है कि अगर धरती को नष्ट होने से बचाना तो गंदे कपड़े पहनने चाहिए। जानकारों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि लोग आज कल वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल कपड़े धुलने के लिए ज्यादा करने लगे हैं

जानकारों ने दावा किया है कि अगर धरती को नष्ट होने से बचाना तो गंदे कपड़े पहनने चाहिए। जानकारों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि लोग आज कल वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल कपड़े धुलने के लिए ज्यादा करने लगे हैं। और वॉशिंग मशीन से ज्यादा कपड़े धोने के कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। और इस मुताबिक अगर पृथ्वी को बचना है तो कपड़े कम धुले या यू कहें की हाथों का इस्तेमाल कपड़ों को धुलने में ज्यादा करें और मशीनों का कम।

वैसे तो हर किसी को साफ-सुथरे कपड़े पहनना पसंद है। साफ कपड़े पहनने से एक ओर जहां बीमारियों से बचा जा सकता है तो दूसरी ओर लोगों के बीच शर्मिंदगी भी नहीं महसूस होती है। मगर एक्सपर्ट्स ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है जो वाकई चौकने लायक है । जानकारों ने दावा किया है कि अगर पृथ्वी को नष्ट होने से बचाना है तो गंदे-बदबूदार कपड़े पहनने का निर्णय सही होगा । आपको बताते हैं कि जानकारों ने ऐसा क्यों कहा है। दरअसल, सोसाइटी ऑफ केमिकल इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि वॉशिंग मशीन से कपड़े धुले जाने पर धरती को काफी नुकसान पहुंचता है।

आज कल तो अधिकतर लोग कपड़ों को धुलने के लिए वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं । उनके अनुसार जब से वॉशिंग मशीन का उपयोग बढ़ा है तब से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता दिख रहा है। एक बार वॉशिंग मशीन का उपयोग करने से हम 7 लाख से ज्यादा माइक्रोस्कोपिक प्लास्टिक फाइबर पर्यावरण में रिलीज करते हैं। ये प्लास्टिक फाइबर कपड़ों से निकलता है और ये नालियों के रास्ते नदी, नहरों तक जाता है और जलजीवों पर बुरा प्रभाव डालता है साथ ही धीरे धीरे पृथ्वी को नष्ट करने का काम कर रहा है ।

ऐसे में अब सवाल ये उठता है की आखिर कपड़े धुले तो धुले कब, इन सभी सवालों का समाधान देते हुए एक्सपर्ट्स ने कपड़ों को धुलने के लिए समय बताया है जिसका पालन करने से हम पर्यावरण को भी बचा सकते हैं और कपड़ों को भी जल्द खराब होने से रोक सकते हैं। जानकारों ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमे उन्होंने बताया है की की किन कपड़ों को कब कब धुले । उस रिपोर्ट के अनुसार जीन्स महीने में सिर्फ एक बार धुलनी चाहिए वहीं ट्राउजर या जंपर्स को 15 दिनों में एक बार धुलना चाहिए। पैयजामा को हफ्ते में एक बार धुला जा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिम में पहनने वाले कपड़े और अंडरवियर को रोज धोया जाना चाहिए मगर उन कपड़ों को वॉशिंग मशीन के जगह हाथ से धुला जाना चाहिए।

जानकारों ने बताया कि महिलाओं के टॉप 5 बार पहनने के बाद धुले जाने चाहिए, ड्रेसेज को 4 से 6 बार पहनने के बाद धुलना चाहिए और महिलाओं की ब्रा को हफ्ते में एक बार धुला जाना चाहिए। सस्टेनबल क्लोदिंग ग्रुप के को-फाउंडर ओर्सोला डी कैस्ट्रो ने कहा कि पहले जब वॉशिंग मशीन नहीं थी तब लोगों को कपड़े धुलने में काफी समस्या होती थी इस वजह से तब लोग कम कपड़े धुलते थे और जयद दिनों तक कपड़ों को बिना धुले चलते थे ,ऐसा इसलिए क्यूंकि तब उन्हें हाथों से कपड़े धुलने होते थे और इसमे उन्हें काफी मेहनत पड़ती थी । परंतु वॉशिंग मशीन के आने के बाद धीरे धीरे इसका उपयोग बढ़त गया और आज तो लोगों की आम जरूरत स बन गया है। लेकिन सभी अच्छाइयों के साथ साथ कुछ बुराइयाँ भी है इसमें जो की लोगों को सांझनी होगी और इसका इस्तेमाल कम कर पर्यावरण को नष्ट होने से बचाना होगा ।

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