काली शंकर के निर्देशन में भोजपुरी फिल्म “लाडली” का शुभ मुहूर्त छपरा में संपन्न

"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" और "बेटियाँ भी बेटों से बढ़कर होती हैं" समाज में यह संदेश पहुंचाने और महिलाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भोजपुरी फ़िल्म लाडली का निर्माण किया जा रहा है।

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “बेटियाँ भी बेटों से बढ़कर होती हैं” समाज में यह संदेश पहुंचाने और महिलाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भोजपुरी फ़िल्म लाडली का निर्माण किया जा रहा है। लीलावती फिल्म्स एंटरटेनमेंट वर्ल्डवाइड बैनर के तले बन रही फिल्म लाडली का शुभ मुहूर्त छपरा में फिल्म के सितारों के साथ धूमधाम से संपन्न किया गया।

इस फ़िल्म के निर्देशक काली शंकर हैं। फ़िल्म के निर्माता अविनाश यादव हैं। इस फ़िल्म से फ़िल्म इंडस्ट्री में नये हीरो एंट्री कर रहे हैं। एक हैं थियेटर आर्टिस्ट अविनाश यादव और दूसरे हैं गायक से नायक बने प्रद्युम्न परदेसी। उनका साथ दे रही हैं भोजपुरी की स्टार अभिनेत्री तनु श्री और सोशल मीडिया क्वीन प्राची सिंह। उनकी रोमांटिक केमेस्ट्री दर्शकों का खूब मनोरंजन करेगी।

यह फ़िल्म भाई-बहन और बाप-बेटी के मर्म-स्पर्शी रिश्ते पर आधारित है। फ़िल्म के संगीतकार ओम झा, गीतकार प्यारेलाल यादव, डॉ कामेंद्र सिंह, सुमित चन्द्रवंशी, आजाद हैं। कोरियोग्राफर कानू मुदार्जी, फाइट मास्टर हीरा यादव, डीओपी सूरज यादव, आर्ट डायरेक्टर नियाज़, प्रोडक्शन कन्ट्रोलर राजू यादव व मुकेश तिवारी हैं। फ़िल्म प्रचारक रामचन्द्र यादव हैं। फ़िल्म लाडली में नवोदित हीरो अविनाश यादव और प्रद्युम्न परदेसी के साथ तनुश्री, प्राची सिंह, बृजेश त्रिपाठी, अमित शुक्ला, लोटा तिवारी, अजय सूर्यवंशी, हीरालाल यादव, किरण यादव, रिंकू भारती, डॉ. कमेंद्र सिंह, शंकर जी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

गौरतलब है कि फ़िल्म के शुभ मुहूर्त के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए डायरेक्टर जोड़ी काली शंकर के काली प्रसाद ने बताया कि यह एक यूनिक कॉन्सेप्ट पर बेस्ड मूवी है जिसमें बेटी के प्रति समाज मे संदेश दिया गया है। लगभग एक साल से हम इसकी कहानी पर काम कर रहे थे और अब जाकर इस फ़िल्म की शूटिंग शुरू हुई है। ओम झा ने इसके प्यारे गाने बनाए हैं इसमे भाई-बहन का पावन त्यौहार रक्षाबंधन यानि राखी का भी एक सांग है। फ़िल्म का क्लाइमेक्स सांग दर्शकों के रौंगटे खड़े कर देगा और सोचने पर मजबूर कर देगा।

उन्होंने आगे कहा कि मैं इस फ़िल्म के जरिये बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देना चाहता हूं। कुछ लोगों की आज भी यह गंदी मानसिकता है कि बेटियां घर का बोझ होती हैं या लड़कियां कुछ नही कर सकतीं। जैसे ही बेटी जन्म लेती है एक सन्नाटा छा जाता है जबकि बेटा पैदा होते ही खुशियों की मिठाईयां बांटी जाती हैं। जबकि आज बेटियां कुछ भी कर सकती हैं। डायरेक्टर जोड़ी के शंकर ने बताया कि भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि दो लोगों की जोड़ी मिलकर एक फ़िल्म डायरेक्ट कर रही है। काली-शंकर के रूप में हमारी जोड़ी भोजपुरी की पहली डायरेक्टर जोड़ी है।

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