सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की मुस्कान से ,दिल्ली बीजेपी कैंप हो गया डिस्टर्ब ?

लखनऊ:- कोविड कहर के बीच उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव के नजीते आने के बाद बीजेपी को जोरदार झटका लगा है.दूसरी ओर वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की पार्टी के उम्मीदवारों ने जबरजस्त जीत हासिल कर बीजेपी को घर से ही हरा दिया।

कुछ ही महीनों बाद यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं. ठीक उससे पहले पंचायत चुनाव में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है.

झटका लगने से दिल्ली बीजेपी कैंप तक चिंता बढ़ गई है अगर इस चुनाव के नतीजों का कनेक्शन कोविड महामारी से भी जोड़ कर देखा जाए तो बीजेपी के लिए बुरे दिन की घंटी बज चुकी है।

बतादें पंचायत चुनाव के नतीजों का मायने समझने के लिए आप अयोध्या के आंकड़े को पढ़िए.. उसी अयोध्या को,जहां रामलला के नाम पर बीजेपी दशकों से राजनीति करती रही है.राम मंदिर का निर्माण तो शुरू हो गया है लेकिन चुनाव में बीजेपी को ज़बरदस्त झटका लगा .

बात करें तो यहां ज़िला पंचायत की 40 सीटें हैं.राम नगरी अयोध्या में समाजवादी पार्टी को 24 सीटें मिली.और भगवाधारी बीजेपी को सिर्फ 6 सीटें मिली.

अब आप समझ सकते हो कि बीजेपी कभी सपनों में भी नहीं सोची होगी कि इतने बुरे दिन आएंगे।
शर्म से डूबे बीजेपी के नेता अब बोल रहें कि बाग़ियों के कारण हार हो गई है.. लेकिन यूपी की योगी सरकार तो अयोध्या को अपने बेहतर काम काज का आईना बताती रही है.

यहीं से उसका हिंदुत्व का भी एजेंडा चलता है.और दीवाली पर राम नगरी में लाखों दीए जलाने की परंपरा योगी सरकार ने ही शुरू की थी बावजूद इसके इतने बुरे दिन देखने पड़े।

यही हाल पीएम नगरी वाराणसी में भी देखने को मिला.यहाँ तो उससे भी बुरे समाचर रहें क्योंकि यहाँ समाजवादी पार्टी ने तो अपना झंडा ही गाड़ दिया. बतादें बीजेपी को 8 तो समाजवादी पार्टी को 14 सीटों पर जीत दर्ज की है।फ़िलहाल नसीब में रही बीएसपी को 5 और अपना दल को 3 सीटें मिली.

कई मंत्रियों के नाते रिश्तेदार की हो गई बेज्जती

गोरखपुर में भी कुछ परेशानियों की वजह रहीं. क्योंकि योगी आदित्यनाथ के लिए तो ये व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला बन जाता है.यहां भी दोनों पार्टियों को 19-19 सीटें मिलीं. जबकि बीएसपी के हिस्से में 2 और निर्दलीय और बाक़ी के खातों में 27 सीटें .कांग्रेस का तो पत्ता ही साफ़ रहा।

2014 के लोकसभा चुनाव में तो बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी को 80 में से 73 सीटें मिली थीं. बीएसपी का खाता तक नहीं खुला था. जबकि समाजवादी पार्टी को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं थीं और 2017 के विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने सबका सूपड़ा साफ़ कर दिया.

फिर पिछले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव, मायावती और चौधरी अजीत सिंह मिलकर भी बीजेपी का विजय रथ नहीं रोक पाए. लेकिन पहली बार पंचायत चुनाव के बहाने अखिलेश यादव को मुस्कुराने का मौक़ा मिला है.

आख़िर पंचायत चुनाव में बीजेपी अच्छा क्यों नहीं कर पाई ?

गौरतलब है कि बीजेपी के लिए ये शुभ संकेत नहीं है. क्योंकि बंगाल मेंआख़िरी चार चरणों के चुनाव में भी बीजेपी पहले से कमजोर होती गई. और सत्ता में रहते हुए भी बीजेपी के बड़े बड़े नेताओं और योगी सरकार के मंत्रियों के नाते रिश्तेदार भी चुनाव हार गए.

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